जैसे ही हमें यह पता चला कि
गांधी-चौक वाली दुकान पर
बहुत सस्ते जूते मिल रहे हैं
जो सस्ते होते हुए भी
बहुत दिनों तक चलते हैं
मैं दौड़ा हुआ उस जूते की दुकान पर आया और दुकानदार से फरमाया-
" भाई जान ,मेरे पैर का नाप का जूता तो दिखाइए और इसकी क्या कीमत है और कितने दिन चलेगा यह भी बताइए "
इतना सुनते ही दुकानदार बोला, " भाई साहब, माफ कर दो
हमारी दुकान के तो सभी जूते खरीदे जा चुके हैं
और आप जो जूते अलमारियों में देख रहे हैं हम इनका नेताओं से एडवांस पा चुके हैं "
मैंने कहा, " नेता और जूतों का एडवांस !
आखिर नेता इतने जूते खरीद कर क्या करेंगे क्या गरीबो में बांटकर वोट जुटाएेंगे ? " दुकानदार बोला, " नहीं जनाब संसद और विधानसभाओं में खुलकर चलाएं ।"
ज़्यादातर जब कभी कहीं किसी किनारे बैठा दिखता है कोई, सहारे मौसम उचित लगता है । कभी दिखता नहीं कोई महारथी बैठा, मुस्कुराता, इठलाता, दरिया निहारता । दरिया दुख देना दरसाता है? पानी पिछले पाप पूछता है? पहाड़ जब पानी को पसीने सा गर्मी में गड़ने देता है, नररात्मकता देती नहीं क्या नदी उसे? सोखती है? सहलाती है? साधती है? संकोच, आत्मा और मन कुछ तो विचित्र ताक़त है स्थिर बहाओ में पढ़ा है कहीं, कुछ स्थानीय निवासियों का ये मानना भी है की ऐसी पवित्र जगहों पर रात्रि के समय पारियाँ स्नान करने आती है। चंद्रताल
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