सोचो, महाभारत का समय आया पार्थ ने प्रभु को समझाया "किसी को कुछ समझ ना आया" क्या बताया? रोशनी का खेल ऐसा हर ग़लत वस्तु पर छाया। प्रभु बोले, खेल दिखाया इश्क़ का, कर्तव्य बाध्य, अंग्रेज कैसे आयेंगे। बोध हो, जब तुम्हें, हर इंसान समान ना होगा कुछ ख़ज़ाने को विश्वास खोद देंगे कुछ हथियाई चीज़ से इश्क़ लड़ाएँगे । तब महसूस कर उनको, ज़माने को उन्हें जमाने ना देना, जाने देना, जेम्स बना देना। पार्थ को शुक्रियाँ प्रभु का, क़र्ज़ होगा, ख़ुशी होगी। और दर्शकों से माफ़ी होगी, गुज़ारिश होगी, फिर आना ।
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