क्या कहा -चुनाव आ रहे हैं तो खड़े हो जाइए देश जो थोड़ा बहुत बचा है उसे आप खा जाइए ! देखिए ना लोग किस तरह खा रहे हैं सड़कें, पुल तथा फैक्ट्रियां तक पचा रहे हैं जब भी डकार लेते हैं चुनाव हो जाता है और बेचारा आदमी नेताओं की भीड़ में खो जाता है संविधान की धाराओं को स्वार्थ गटर में मिलाने का हर प्रयास जारी है खुशबू के तिस्करों पर चमन की जिम्मेदारी है सबको अपनी-अपनी पड़ी है हर काली तस्वीर सुनहरे फ्रेम में जड़ी है सारे काम अपने आप हो रहे हैं जिसकी --- में गवाह है उसके सारे खून माफ हो रहे हैं इंसानियत मर रही है और राजनीति सभ्यता के सफेद कैनवास पर आदमी के खून से हस्ताक्षर कर रही है मूल अधिकार ? बस वोट देना है सो दे जाओ और गंगाजल के देश में जहर पिया जाओ ।
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