आजकल की फिज़ाओ में वो महक , धीमी सी कहाँ | मुंध कर आँखों को चूमें वो सिद्दत , होठो में कहाँ | साँझ पहर की लालिमा को छाने , जो पत्ती से , वो पेड़ है कहाँ | चमड़े के चोट को भरदे वो , पावन मिटटी है कहाँ | गर्म रत की वो रहत , पुरबा हवा , की वो खुसबू है कहाँ | माँ के आंचल तले जीवन गुजार दे, वो बच्चो की मस्त टोली है कहाँ | ढूंढ के इनको ऐ धरती तू , मुझको बता दे ; मेरे दिल की चाहत है जाने की वहाँ ||
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