क्या कहूं कि वो परियों का रुप होती है | या कड़कड़ाती ठंड में सुहानी धूप होती है|| चिड़ियों की चहचहाहट की तरह | या निश्चल खिलखिलाहट|| वह होती हैं उदासी की हर मर्ज की दवा की तरह| या उमस में शीतल हवा की तरह || चिड़ियों की चहचहाहट है | या निश्छल खिलखिलाहट है | वह आंगन में फैला उजाला है || या शायद गुस्से पर लगा ताला है | पहाड़ की च*** पर सुबह की किरण है || या जो जिंदगी जीने का सही आचरण है| वह ताकत जो छोटे से घर को, महल कर द | या जो काफिया जो ग़ज़ल को मुकम्मल कर द* || अक्षर जो ना हो तो वर्णमाला अधूरी है || वह जो सबसे ज्यादा जरूरी है|| यह नहीं कहूंगा कि वह हर वक्त सांस सांस होती है|| बेटियां तो सिर्फ एहसास होती है |||||| उसकी आंखें न किसी पिता से गुड़िया मांगती है ना खिलौना ||| कब आओगे बस एक छोटा सा सवाल सलोना | |जल्दी आऊंगा अपनी मजबूरी को छुपाते हुए वह देता है जवाब ||| तारीख बताओ टाइम बताओ उंगलियों पर करने लगती है हिसाब ||| और जब वह पिता नहीं द* पाता सही सही जवाब || अपने आंसुओं को छिपाने के लिए चेहरे पर रख लेती है किताब ||| ऑस्ट्रेलि...
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