क्या कहूं कि वो परियों का रुप होती है |
या कड़कड़ाती ठंड में सुहानी धूप होती है||
चिड़ियों की चहचहाहट की तरह |
या निश्चल खिलखिलाहट||
वह होती हैं उदासी की हर मर्ज की दवा की तरह|
या उमस में शीतल हवा की तरह ||
चिड़ियों की चहचहाहट है |
या निश्छल खिलखिलाहट है |
वह आंगन में फैला उजाला है ||
या शायद गुस्से पर लगा ताला है |
पहाड़ की च*** पर सुबह की किरण है ||
या जो जिंदगी जीने का सही आचरण है|
वह ताकत जो छोटे से घर को, महल कर द |
या जो काफिया जो ग़ज़ल को मुकम्मल कर द* ||
अक्षर जो ना हो तो वर्णमाला अधूरी है ||
वह जो सबसे ज्यादा जरूरी है||
यह नहीं कहूंगा कि वह हर वक्त सांस सांस होती है||
बेटियां तो सिर्फ एहसास होती है ||||||
उसकी आंखें न किसी पिता से गुड़िया मांगती है ना खिलौना |||
कब आओगे बस एक छोटा सा सवाल सलोना |
|जल्दी आऊंगा अपनी मजबूरी को छुपाते हुए वह देता है जवाब |||
तारीख बताओ टाइम बताओ उंगलियों पर करने लगती है हिसाब |||
और जब वह पिता नहीं द* पाता सही सही जवाब ||
अपने आंसुओं को छिपाने के लिए चेहरे पर रख लेती है किताब |||
ऑस्ट्रेलिया में छुट्टियां mercedes में ड्राइवर फाइव स्टार में खाना या नए-नए एयरपोर्ट्स नहीं मांगती, ना ही वह बहुत सारे पैसे अपने पिगी बैंक में उड़ना चाहती है |
|वह तो बस अपने माता-पिता के साथ खेलना चाहती है ||
और वह अभागा पिता मजबूरी भरी जवाब देने लगता है जवाब ¦¦
और झूठा ही सही उसे एहसास कराती है जैसे सब समझ गई हो||h
लेकिन आंखें बंद करके रोती है |||सपने में खेलते हुए मेरे साथ सोती है||||||`
जिंदगी न जाने इतना क्यों, उलझ जाती है ||और हम समझते batiya bojh hoti hai !!
....
feel free to ask any poem on any topic you will be help without any delay.....
या कड़कड़ाती ठंड में सुहानी धूप होती है||
चिड़ियों की चहचहाहट की तरह |
या निश्चल खिलखिलाहट||
वह होती हैं उदासी की हर मर्ज की दवा की तरह|
या उमस में शीतल हवा की तरह ||
चिड़ियों की चहचहाहट है |
या निश्छल खिलखिलाहट है |
वह आंगन में फैला उजाला है ||
या शायद गुस्से पर लगा ताला है |
पहाड़ की च*** पर सुबह की किरण है ||
या जो जिंदगी जीने का सही आचरण है|
वह ताकत जो छोटे से घर को, महल कर द |
या जो काफिया जो ग़ज़ल को मुकम्मल कर द* ||
अक्षर जो ना हो तो वर्णमाला अधूरी है ||
वह जो सबसे ज्यादा जरूरी है||
यह नहीं कहूंगा कि वह हर वक्त सांस सांस होती है||
बेटियां तो सिर्फ एहसास होती है ||||||
उसकी आंखें न किसी पिता से गुड़िया मांगती है ना खिलौना |||
कब आओगे बस एक छोटा सा सवाल सलोना |
|जल्दी आऊंगा अपनी मजबूरी को छुपाते हुए वह देता है जवाब |||
तारीख बताओ टाइम बताओ उंगलियों पर करने लगती है हिसाब |||
और जब वह पिता नहीं द* पाता सही सही जवाब ||
अपने आंसुओं को छिपाने के लिए चेहरे पर रख लेती है किताब |||
ऑस्ट्रेलिया में छुट्टियां mercedes में ड्राइवर फाइव स्टार में खाना या नए-नए एयरपोर्ट्स नहीं मांगती, ना ही वह बहुत सारे पैसे अपने पिगी बैंक में उड़ना चाहती है |
|वह तो बस अपने माता-पिता के साथ खेलना चाहती है ||
और वह अभागा पिता मजबूरी भरी जवाब देने लगता है जवाब ¦¦
और झूठा ही सही उसे एहसास कराती है जैसे सब समझ गई हो||h
लेकिन आंखें बंद करके रोती है |||सपने में खेलते हुए मेरे साथ सोती है||||||`
जिंदगी न जाने इतना क्यों, उलझ जाती है ||और हम समझते batiya bojh hoti hai !!
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Thank you for reading... Comment your interest..
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